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ब्रेस्ट आयरनिंग : लैंगिक अमानवीय प्रथा का एक आलोचनात्मक विश्लेषण

सुश्री इंदु सिंह ‘इंदुश्री’ (59-62)

साराशं

यह शोध पत्र ब्रेस्ट आयरनिंग (स्तन इस्त्री) की अमानवीय और कम रिपोर्ट की गई प्रथा का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह प्रथा, जो मुख्य रूप से पश्चिम और मध्य अफ्रीका के कुछ हिस्सों, जैसे कैमरून, नाइजीरिया, चाड और बेनिन से संबंधित है, वैश्विक प्रवास के साथ यूके जैसे विकसित देशों में भी फैल गई है। इस क्रूर प्रक्रिया में युवा, अल्पवयस्क लड़कियों के स्तन ऊतक (breast tissue) को विकसित होने से रोकने के लिए गर्म वस्तुओं (जैसे पत्थर या स्पाटुला) से दागा जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कृत्य के पीछे का उद्देश्य लड़कियों को यौन उत्पीड़न, बलात्कार और कम उम्र में गर्भावस्था से ‘बचाना’ होता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह प्रथा विश्व स्तर पर लगभग 3.8 मिलियन लड़कियों को प्रभावित करती है और इसे लिंग आधारित हिंसा के तहत ‘अंडर-रिपोर्टेड क्राइम’ की श्रेणी में रखा गया है। यह विश्लेषण स्थापित करता है कि यह प्रथा पुरुषों के दुराचार पर नियंत्रण लगाने के बजाय, पितृसत्तात्मक मानसिकता के कारण पीड़ित पर ही अत्याचार करने का एक वीभत्स परिणाम है, जिसके गंभीर शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दीर्घकालिक परिणाम होते हैं। इस शोध का निष्कर्ष है कि इस कुप्रथा के दमन के लिए वैश्विक जागरूकता और पितृसत्तात्मक संरचना के खात्मे पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।

शब्‍द कुंजी: ब्रेस्टआयरनिंग, लड़कियाँ, पितृसत्तात्मक

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