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स्वतंत्रता आंदोलन एवं महिला सशक्तिकरण में बंगाल की महिलाओं का योगदान

डॉ. रानी कुमारी (43-49)

साराशं

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल की महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी रहा है। सामाजिक रूढ़ियों और पितृसत्तात्मक प्रतिबंधों को तोड़ते हुए इन महिलाओं ने न केवल राजनीतिक आंदोलन में भाग लिया बल्कि बौद्धिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई। लीला रॉय ने महिला शिक्षा, मताधिकार, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और क्रांतिकारी संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाई। कल्पना दत्ता, प्रीतिलता वादेदार और नानीबाला देवी जैसी क्रांतिकारी महिलाओं ने सशस्त्र संघर्ष में प्रत्यक्ष भागीदारी की तथा ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। वहीं बेगम रोकेया ने महिला शिक्षा, नारीवाद और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। बसंती देवी, सरला देवी चौधरानी, कमला दास गुप्ता और लबन्या प्रभा घोष ने समाज सुधार, असहयोग, सविनय अवज्ञा तथा भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया। सुनीति चौधरी, सुहासिनी गांगुली और वीना मजूमदार ने महिलाओं के संगठन, शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय आंदोलनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सभी महिलाओं ने अपने त्याग, साहस और नेतृत्व से सिद्ध किया कि भारत की स्वतंत्रता केवल पुरुषों का संघर्ष नहीं था, बल्कि महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर स्वतंत्रता और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका यह योगदान आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

शब्‍द कुंजी: महिला सशक्तिकरण, बंगाल की स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी आंदोलन, नारी शिक्षा एवं अधिकार, सामाजिक सुधार

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